Foreign Currency को क्यों इतना महत्वपूर्ण माना जाता है सारे देशों में

आज की ग्लोबल इकोनॉमिक्स में विदेशी मुद्रा का महत्वपूर्ण स्थान है। जब भी एक देश दूसरे देश के साथ व्यापार करता है, यात्रा करता है या  निवेश करता है, तो विदेशी मुद्रा का उपयोग किया जाता है. विदेशी मुद्रा केवल डॉलर या योरो तक सीमित नहीं है, बाल्की ये किसी भी देश की वाह मुद्रा होती है जो उसके उपयोग में लायी जाती है

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Foreign Currency किया है ?

Foreign Currency यूएस मुद्रा को कहा जाता है जो किसी अन्य देश में जारी की जाती है और अंतर्राष्ट्रीय लेन – देन के लिए उपयोग होती है। उधारन के लिए, भारत के लिए अमेरिका डॉलर (यूएसडी), यूरो(EUR), जापानी येन (JPY), ब्रिटिश पाउंड (GBP) आदि सभी विदेशी मुद्राएं हैं।

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Foreign Currency की आवश्यकता क्यों होती है?

विदेशी मुद्रा की आवश्यकता टैब पढ़ती है जब कोई व्यक्ति या देश विदेशियों के साथ व्यापार करता है, पढ़ाई करता है, घुमने जाता है, या वहां निवेश करता है। उदयहरण:

कोई भारतीय अगर अमेरिकी जानता है, तो उसे डॉलर में भुगतान करना होगा

कोई कंपनी अगर जापान से माल खरीदती है, तो वह येन में भुगतान करेगी।

विदेशी स्टूडियो को यूनिवर्सिटी फीस विदेशी मुद्रा में चुकानी पड़ती है।

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Foreign Currency विनिमय दर (Exchange Rate)

Foreign Currency का लागत “विनिमय दर” दुआरा तै हो गया है। ये डर बताता है कि एक देश की मुद्रा के बदले दूसरे देश की मुद्रा कितनी मिलेगी।

उदाहरण :

1USD = 83 INR

इसका मतलब है कि 1 अमेरिकी डॉलर के बदले 83 भारतीय रुपये मिलेंगे।

ये दर बाजार मांग और आपूर्ति, ब्याज दरें एल, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक घटनाएं प्रभावहीन होती हैं।

 

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Foreign Currency बाजार :

दुनिया में सबसे बड़ी फाइनेंस बाजार “विदेशी मुद्रा बाजार” (Foreign Exchange Market या Forex Market) है.

इसमे देश – विदेशी मुद्रा की खरीद – विनिमय होती है। इस बाजार में बैंक, वित्त संस्थान, कंपनियां, सरकारें और सामान्य निवेशक हिसा लेते हैं।

Foreign Currency बाज़ार 24 घंटे खुला रहता है और इसका कोई बहुत सेंट्रल नहीं होता। ये इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर काम करता है।


India में विदेशी मुद्रा से जुड़े नियम:

India में विदेशी मुद्रा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत आता है। ये कानून भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दुआरा नियंत्रित किया जाता है। फेमा के अनुसार:

कोई भी भारतीय नागरिक सिमित मात्रा में ही विदेशी मुद्रा ले जा सकता है।

विदेश यात्रा, पढ़ाई, इलाज या बिजनेस के लिए अलग-अलग सीमा तय हो गई है।

विदेश से प्राप्त धन (प्रेषण) भी फेमा के नियम के तहत ही स्वीकार होता है .

 


Foreign Currency अर्जन के स्ट्रीम

भारत में विदेशी मुद्रा आने के कुछ प्रमुख सूत्र हैं

1. निर्यात – भारत से भेजे गए सामान और सेवाओं की कीमत विदेशी मुद्रा में मिलती है।

2. विदेशी निवेश (एफडीआई और एफआईआई) – जब विदेशी कंपनियां भारत में निवेश करती हैं।

3. एनआरआई रिमेंट्स – विदेश में रहने वाले भारतीय अपने परिवार को जो धन भेजते हैं।

4. पर्यटक – जब विदेशी नागरिक भारत में यात्रा करते हैं, तो वो विदेशी मुद्रा लेते हैं।

 


Foreign Currency भंडार:

विदेशी मुद्रा रिजर्व वह संपत्ति है जो किसी देश के केंद्रीय बैंक (जैसे आरबीआई) के पास विदेशी मुद्रा के रूप में होती है। इसमे डॉलर, सोना, एसडीआर (आईआईएम की मुद्रा), और विदेशी बांड शामिल होते हैं। ये भंडार देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी है।

भारत के पास 2025 में लगभाग 600 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है।


अस्वीकरण

विदेशी मुद्रा वैश्विक व्यापार और वित्त स्थिति का बंधन है। ये देश के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाता है और व्यापार, निवेशक, शिक्षा, तथा पर्यटक को संभव बनाता है। किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा नीति और पर्यटक भंडार उसकी अर्थव्यवस्था का प्रतीक है। आज के वैश्विक युग में विदेशी मुद्रा को हर व्यक्ति के लिए समझना आवश्यक है. इसलिए हमने विदेशी बाजार को समझा है।

 

 

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