Colorectal Cancer होने के 5 संकेत ऐसे जन सकते हैं, जो आपकी 45 साल की उम्र तक बच सकते हैं

Colorectal Cancer, जो कोलन और रेक्टम यानी बड़ी आठ से ज्यादा होता है, आज दुनिया भर में एक तेजी से रोग का विस्तार बढ़ता जा रहा है. पहले इस्का स्क्रीनिंग की उम्र 50 साल रखी गई थी, लेकिन हाल के वर्षों में विशेषज्ञ और शोधकर्ता डेटा को ध्यान में रखते हुए इसे 45 साल का दिया गया है। ये डिसिजन काई लोगो की जान बच्चों में मददगर साबित हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद ये सभी मजाक वाले लोग तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। आईये जानते हैं इस बदलाव का महत्व, और इसे चुनौतियाँ के बारे में।
Screening Age को 45 करने का करण
हालिया पढ़ाई से ये सामने आया है की Colorectal Cancer अब तक उमर के लोगो में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। 40 से 49 साल के लोगो में इस मामले में पिछले दो दशको में उलेखनिये विकास हुआ है। American Cancer Society और अन्य संस्थानों ने इस बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुई स्क्रीनिंग की कि उम्र 50 से घटाकर 45 करने की सिफ़ारिश की।
ये कदम इसलिए भी जरूरी था क्योंकि जब तक लच्छन सामने आते हैं, तब तक बीमार अक्सर एडवांस स्टेज में पहुंच जाती है, जिसका इलाज महंगा हो जाता है। समय बराबर स्क्रीनिंग से सुरुवती स्थिति में अक्सर पकरा जा सकता है और इसे रोका भी जा सकता है।
—

जल्दी स्क्रीनिंग करने से लाभ:
1. जल्दी पहचान : Cancer को सुरुवती अवस्था में पकारने से इलाज आशा और प्रभावशाली हो जाता है।
2. पॉलिप्स हटाना: स्क्रीनिंग के दौरान अगर कोई पॉलिप (कैंसर बनने से पहले की गांठ) मिलती है तो उसे तुरंट हटया जा सकता है।
3. जीवन सुरक्षा: समय पर जांच और इलाज से मृत्यु दर में भारी कमी है।
4. लंबी उम्र: स्क्रीनिंग से ना सिर्फ मौत टालती है, बाल्की लोगो की जीवन की गुणवत्ता भी सुधरती है।
⚠️ लेकिन क्यू नहीं पाहुंच पा रह ये सुबिधा सभी तक ?

हलाकी स्क्रीनिंग उम्र 45 करने से काई जिंदगी बचै जा रही है, लेकिन ये सभी जरूरी मांधो तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके पीछे काई कारण है.
1. Awareness की कमी :
बहुत से लोगो को इस तरह बदला की जानकारी ही नहीं है, खासर ग्रामीण इलाको और अल्पशिक्षित वर्ग में। उन्हें ये भी नहीं पता होता कि स्क्रीनिंग की गई है और क्या जरूरी है।
2. स्वास्थ्य सुबिधाये की आई समानता:
ग्रामीण और पिचरे इलके में स्क्रीनिंग की सुविधा या तो मोजुद नहीं है या बहुत सिमित है। शहर में रहने वाले लोग, गांव में रहने वाले लोग, मेडिकल चेकअप तक पहुंचने में पिछे रह जाते हैं.
3. आर्थिक समस्याएँ:
भारत जैसे देश में स्क्रीनिंग की लगत भी एक बहुत बड़ी बाधा है। काई लोग इसे अफोर्ड नहीं कर सकते या इसके लिए टाइम नहीं निकाल पाते।
4. भय और सामाजिक भय:
Colorectal Screening में एंडोस्कोपी जैसी प्रक्रिया होती है, जो काई लोगो के लिए आसान होती है। लोग शर्म या डर की वजह से चाज करने से डरते हैं।

5. डॉक्टर की तरफ से काम रेफर करना:
काई बार डॉक्टर भी 45 साल के मरीजो को स्क्रीनिंग की सलाह नहीं देते, खास अगर काई खास लछन ना हो।
→किन लोगों को विशेष रूप से स्क्रीनिंग की जरूरत है ?
• जिनके परिवार में Colorectal Cancer का इतिहास है उसे जरूर चेकअप कराना चाहिए
• जिनको क्रोनिक बीमारी हो (जैसी क्रोन्स बीमारी या औल्सरेटिव कोलाइटिस)
• मोटापा, धुमेरपान, शराब या फाइबर की कमी वाला खानपान रखने वाले लोग
• जिन्का जीवन अधिक तनाव पूर्ण या निष्करिये है
→समाधान क्या है ?
1. बिग पैमाने पर जन – जागृति अभियान चलाया जाए, खाश्कर ग्रामीण इलाकों में।
2. सरकारी योजना में मुफ्त या सब्सिडी वाली स्क्रीनिंग को शामिल किया जाएगा।
3. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित कर्मचारी और सशधनो की उपलब्धता सुनीचित की जाए।

4. डॉक्टरों को प्रोटोकॉल के तहत हर 45+ मरीज़ को स्क्रीनिंग की सलाह देने का निर्देश मिलना चाहिए।
5. मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए कैंसर जनरुकता फैलनी चाहिए।
